ईख की बंधाई
ईख की बंधाई: ईख बिहार राज्य की प्रमुख नगदी फसल है जिस पर यहाँ का चीनी तथा गुड़ उद्योग पूर्ण रूप से आश्रित है । बिहार में ईख लगभग 2.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्रतिवर्ष उत्पादित किया जा रहा है। यहाँ की औसत उपज लगभग 65.98 टन प्रति हेक्टेयर है।

ईख की बंधाई
ईख की अच्छी पैदावार के लिए विभिन्न तरह की क्रियाओं और प्रबंधन का संयोजित होना सुनिश्चित है , जिसमे विभिन्न तरह के रोगों एवं कीटों का प्रबंधन महत्वपूर्ण स्थान रखता है।उसी प्रकार ईख की बंधाई भी एक महत्वपूर्ण योगदान है। ईख की अच्छी फसल होने के बाद भी यदि ईख गिर जाता है तो उपज में भरी निक्सन तथा गुणवत्ता ने भारी कमी होती है एवं विभिन्न तरह के रोगों एवं कीटों का आपतन होता है। ईख की समय पर बंधाई करने से ईख की गुणवत्ता में अधिक प्रभाव पड़ता है।
खेत मे ईख गिरने के कारण:
- तेज वर्षा का होना
- वर्षा के बाद तेज हवा का बहना या तूफान/चक्रवात का आना।
- ईख की उथली बुआई करना।
- ईख की लंबाई का अधिक होना।
- ईख का बहुत अधिक पतला होना।
- अत्यधिक कीट बेधकों का प्रकोप होना।
- बढ़ आना।
- सही तरीके बंधाई का न होना।
- मिट्टी की चढ़ाई की न्यू होना।
- पत्ती लपेटक खरपटेलवरों का खेत में अधिक होना।
- खेत में एक पंक्ति से दूसरे पंक्ति के बीच में उचित दूरी का न होना।
- शीतकालीन समय में खेत में अत्यधिक नामी का होना।
- ईख के खेत से वर्ष के पानी का निकास का उचित प्रबंध न होना।
ईख गिरने के बचाव के उपाय:
- ईख के खेत में अत्यधिक उर्वरक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
- खेत में अत्यधिक खरपतवारों को नहीं रखना चाहिए एवम समय समय पर उनकी सफाई करवानी चाहिए।
- वर्षा प्रारंभ होने से पहले ईख में मिट्टी चढ़ाई का कार्य पूर्ण से कर देना चाहिए।
- ईख की बुवाई के समय गहराई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
- ईख की अधिक लंबाई होने पर उसकी दो जगह से बंधाई करना चाहिए।
- ईख की बंधाई का तरीका एवं समय उचित होना चाहिए।
- ईख को कीट बेधकों से बचाव करना चाहिए एवं समय–समय पर देखते रहना चाहिए।
- शीतकालीन ईख में अधिक सिंचाई नहीं करनी चाहिए एवं सिंचाई करते समय हवा चलब्रही हो तो सिंचाई रोक देनी चाहिए।
- ईख बुवाई के समय पंक्ति से पंक्ति के बीच की दूरी उचित होनी चाहिए, जिसेसे वर्षा का पानी एवं हवा आसानी से पर कर जाए।
- वर्षा चक्रवात या तूफान आने के बाद यदि ईख गिर जाता है तो ईख के खेत से पानी निकालकर ईख को सीधा करके बंधाई कर दें एवं जड़ों पर फावड़े से मिट्टी चढ़ा देना चाहिए।
- जिन प्रजातियों में ईख अगोला की तरफ मोटा एवं नीचे की तरफ पतला हो उनकी दो जगह बंधाई करने चाहिए।
- पानी निकास का उचित प्रबंध करना चाहिए।
- बलुई वाली भूमि में ईख को सिंगल क्लांप विधि से बंधाई करनी चाहिए।
ईख के बंधाई की बिधियाँ:
- चेन विधि: इस विधि में ईख की एक पंक्ति में उपस्थित सभी थानों को एक सीधी पंक्ति में बंधते है। इसमें ईख की पत्ती से बनी रस्सी का प्रयोग करते है, इसमें दूसरी पंक्ति का सहारा नहीं लिया जाता है।
- कैंची विधि: इस विधि में ईख की दो पंक्तियों के एक–एक थान ईख को लेकर आपस में बांधने के बाद इसकी आकृति कैंचीनुमा दिखती है, जिसके कारण इसको कैंची विधि कहा जाता है। इस बांधने के लिए ईख की पत्तियों से बनी रस्सी का प्रयोग किया जाता है। अधिकतर वर्षा के बाद ईख गिरने पर इस विधि का प्रयोग किया जाता है।

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