प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (75% तक अनुदान)

पानी की काम खपत और किसानों की सहूलियत के लिए प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सिंचाई के लिए उपयुक्त उपकरणों पर भरी सब्सिडी 75% दे रही है। योजना का मुख्य उद्देश्य ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को प्रभावी ढंग से विभिन्न फसलों में अपनाने के लिए प्रोत्साहन करना है।
पानी की जरूरतों और कमी को समझते हुए भारत सरकार ने प्रधान मंत्री कृषि योजना बनाई है, जिसका मुख्य उद्देश्य सभी किसानों को खेती की फसलों के लिए पानी की उपयुक्त जरूरत पूरा करना है ताकि बढ़ और सूखे से होने वाले नुकसान की रोकथाम की जा सके। ऐसे अनुदान से उपलब्ध संसाधनों का कुशल उपयोग हो पाएगा और अधिक पैदावार मिलेगा।
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प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना
भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना चलाई जा रही है. योजना के तहत सिंचाई के उन उपकरणों और योजनाओं पर सरकार भारी सब्सिडी दे रही है, जिनमें पानी, खर्च और मेहनत सबकी बचत होती है. योजना के अन्तर्गत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को प्रभावी ढंग से विभिन्न फसलों (Crops) में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इस सिंचाई पद्धति को अपनाकर 40-50 प्रतिशत पानी की बचत के साथ ही 35-40 प्रतिशत उत्पादन में वृद्धि और उपज के गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
भारत सरकार के ऑपरेशनल गाइडलाइंस 2017 के अनुसार बागवानी, कृषि एवं गन्ना फसल में अधिक दूरी एवं कम दूरी वाली फसलों के 14 विभिन्न लेटरेल स्पेसिंग के आधार पर उपयुक्त फसलों में ड्रिप सिंचाई पद्धति को लगाकर उन्नतिशील उत्पादन एवं जल संचयन किया जा सकता है. स्प्रिंकलर सिंचाई मटर, गाजर, मूली, विभिन्न प्रकार की पत्तेदार सब्जियां, दलहनी फसलें, तिलहनी फसलें. अन्य कृषि फसलें. औषधीय एवं सगंध फसलों में मिनी स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर, सेमी परमानेन्ट पोर्टेबल एवं लार्ज वैक्यूम स्प्रिंकलर (रेनगन) द्वारा सरलता से सिंचाई प्रबंधन किया जा सकता
प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ उठाने के लिए निम्लिखित अनिवार्य
- योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किसान के पास खुद की खेती एवं जल स्रोत उपलब्ध हो।
- योजना का लाभ सहकारी समिति के सदस्यों, सेल्फ हेल्प ग्रुप, इनकूपरेटेड कंपनी, पंचायती राज संस्थाओं, गैर सहकारी संस्थाओं, ट्रस्ट, उत्पादक कृषकों के समूह के सदस्यों को भी दिया जा रहा है।
- ऐसे लाभार्थियों/संस्थाओं को भी योजना को लाभ मिल रहा है जो संविदा खेती (कान्टैक्ट फार्मिंग) अथवा न्यूनतम 7 वर्ष के लीज (एग्रीमेन्ट) की जमीन पर बागवानी/खेती करते हैं।
- एक लाभार्थी कृषक/संस्था को उसी भू-भाग पर दूसरी बार 7 वर्ष के बाद ही योजना का लाभ ले सकता है।
- लाभार्थी किसान अनुदान के अतिरिक्त अवशेष धनराशि स्वयं के स्रोत से अथवा ऋण प्राप्त करके अदा करने के लिए सक्षम हो।
आवेदन करने के लिए उचित दस्तावेज
- आवेदक का आधार कार्ड
- पहचानपत्र
- किसानों के जमीन के कागजात
- जमीन की जमाबंदी (खेत की नकल)
- बैंक पासबुक
- पासपोर्ट फोटो
- मोबाइल न०
आवेदन करने के PMKSY आधिकारिक पोर्टल पे आवेदन करे।
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