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बड चिप प्रणाली

बड चिप प्रणाली

बड चिप प्रणाली: ईख की बुआई के लिए लगभग 6 टन प्रति हे० ईख बीज की आवश्यकता पड़ती है। इस विधि में ईख की कुल उत्पादन लागत का 20 प्रतिशत लागत आता है। इतनी अधिक मात्रा में डंख बीज के उपयोग से न केवल परिवहन में असुविधा होती है, बल्कि कलिका के प्रस्फुटन पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।

बड चिप प्रणाली

बड चिप प्रौद्योगिक ईख बीज मात्रा को कम करने एवं इसके बह गुणन हेतु एक सुविधाजनक विकल्प है। इस विधि में बड चिप्स को पौध वृद्धि रसायन घोल में शोधितकर प्लास्टिक कप अथवा ट्रे में नर्सरी तैयारकरके ईख की फसल होना काफी सुविधाजनक है।

बड चिप प्रणाली:

कलिका चिप ईख बीज के लाभ:

  • पारम्परिक विधि की अपेक्षा (1:10) ईख बीज की अधिक गुणन क्षमता (1:60) इस प्रकार यह विधि ईख बीज की नयी उन्नत प्रजातियों का त्वरित बीज बहु गुणन के लिए अत्यधिक उपयोगी है।
  • प्लास्टिक कप में तैयार की गयी बड चिप में परिवहन की दृष्टि से ईख बीज का भार कम होता है। पारम्परिक विधि (30-35%) की अपेक्षा कलिका चिप्स का प्रस्फुटन (90%) अधिक पाया गया।
  • बड चिप के उपयोग द्वारा भार की दृष्टि में 80 प्रतिशत ईख बीज की बचत,क्योंकि बड चिप्स के लिए लगभग 1 टन बीज प्रति हेक्टेयर उपयोग होता है। जबकि पारम्परिक विधि में 6-8 टन ईख बीज प्रति हे० आवश्यक होता है।
  • बड चिप पौधा के उपयोग से ईख के पौधों की संख्या को अनुकूल किया जा सकता है।
  • इस विधि द्वारा रसयुक्त ईख की संख्या अधिक पाई गई, इससे ईख की उपज भी अधिक होती है।
  • इस विधि द्वारा बचे हुए ईख को रस गुड़ अथवा शर्करा बनाने में उपयोग कर दोहरा लाभ लिया जा सकता है।
  • ईख की उत्पादन लागत घटाने हेतु बड चिप प्रौद्योगिकी आर्थिक दृष्टि से सुविधाजनक विकल्प है।

ये भी पढे: कैसे करें ईख की बंधाई और इसके महत्व ?

कलिका चिप की नर्सरी लगाने की विधि:

  • सर्वप्रथम ताजा एवं रोगमुक्त (10 महीने की आयु वाला) ईख का चयन करते हैं।
  • हस्त चलित यंत्र द्वारा कलिका चिप को निकालते हैं।
  • बड चिप को विशेष रूप से तैयार किये गये पौध रसायन घोल (इथेफॉन, 100 पी०पी०एम० एवं 0.1 प्रतिशत कैल्शियम क्लोराइड) में 2 घंटे भिगोया जाता है।
  • इसके बाद कलिका चिप को कवक नाशी घोल (0.2 प्रतिशत) में 20 मिनट तक उपचारित करते हैं।
  • यदि इस बीज को किसी दूर स्थान भेजना होता है तो इसे पंखे के नीचे रखकर सुखा लेते हैं। इससे इसकी प्रस्फुटन क्षमता 8 से 10 दिन तक बनी रहती है।
  • निम्न ताप की दशाओं (10+1 डिग्री सें०ग्रे०) में इसे कवकनाशी एवं हारमोन से उपचारित करते के पश्चात इसको छिद्रयुक्त पॉलीथीन की थैलियों में अथवा कागज के डिब्बों में रख लेते हैं।
  • अब इन पूर्व उपचारित कलिका चिप को मिट्टी, कार्बनिक पदार्थ एवं बालू 1:1:1 मिश्रण से भरे कप अथवा ट्रे में सीधा बो दिया जाता है।
  • कप के नीचे दो-तीन छोटे-छोटे छिद्र बना दिया जाता है, जिससे जल की अनावश्यक मात्रा स्वतः बाहर निकल जाए।
  • इस पर नियमित रूप से पानी डालना आवश्यक है। तीसरे सप्ताह में इस पर पौध रसायन (PGR) घोल का छिड़काव कर देते है।

बड चिप पौधे को खेत में प्रत्यारोपण करना :

  • पौधा प्रत्यारोपण से पहले नाली को क्लोरपाईरीफॉस (5 कि०ग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर) से उपचारित किया जाता है। जब तक पौधा ठीक से जड़ न पकड़ लेतब तक उसकी नियमित देखभाल करते रहना चाहिए।
  • पौधा को प्रत्यारोपित करते समय नाली को पूर्व में सिंचाई कर देते हैं तथा नाली को खरपतवार रहित रखते हैं।
  • 6-7 हफ्ते बाद स्वस्थ कलिका चिप पौध को पहले से तैयार खेत में छोटे-छोटे गड्ढ़ों में प्रत्यारोपित कर देते हैं।इस विधि में दो पंक्तियों के बीज की दूरी 90 सें.मी. तथा पौध से पौध की दूरी 30 से.मी. रखते हैं।
  • पौध के पूर्णतः जड़ पकड़ने के पश्चात इसमें पारम्परिक तरीके से फसल प्रबन्धन कार्य किया जाना चाहिए।
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