(INCREASE PADDY PRODUCTION)
धान के उत्पादन मे बढ़ोतरी के लिए अपनाएं ये तरीके , मिलेगा जबरदस्त पैदावार (INCREASE PADDY PRODUCTION)

धान के उत्पादन मे बढ़ोतरी के लिए अपनाएं ये तरीके , मिलेगा जबरदस्त पैदावार (INCREASE PADDY PRODUCTION)
धान की नर्सरी से लेकर रोपाई तक की प्रक्रिया मे आधुनिक तकनीकी का उपयोग कर हमारे भाई ज्यादा से ज्यादा उपज ले सकते हैं। खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो चुकी है । किसान धान की पैदावार बढ़ाने के लिए कई तरीके अपनाते हैं। आज हम E KHETIBARI के माध्यम से धान के उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए ऐसी तकनीक के बारे मे बताने जा रहे हैं जो सबसे उपयोगी है ।
समय के अनुसार धान के उत्पादन को बेहतर और अधिक करने के लिए नई तकनीकी का इस्तेमाल सबसे उपयोगी होता है । धान के उत्पादन मे बढ़तोरी के लिए नई तकनीकी का उपयोग मे लेना किसान भाइयों के लिए एक अच्छा बिकल्प है जिससे उपज मे बढ़ोतरी और काम मेहनत के साथ समय की भी बचत होगी।
धान की उपज बढ़ाने के तरीके। (Increase Paddy Production)
उचित न्यूट्रीशन व पोषण :- जैसा की हम सभी जानते है की धान की रोपाई के 25 से 30 दिन बाद धान मे कल्ले फूटने लगते है । इसी समय धान को अधिक न्यूट्रीशन की आवश्यकता होती है । इस दौरान खेत मे ना के बराबर पानी ही रखे और हल्की नमी रहने दें । धान के एक एकड़ खेत में 20 किलो नाईट्रोजन और 10 किलो जिंक की मात्रा देनी चाहिए ।
खेत को रखे सूखा :- धान एक पानी वाली फसल है लेकिन इसका मतलब यह नहीं की फसल को सारे टाइम पानी मे ही रखे । दरअसल , आपको इसकी रोपाई ले 25 दिनों के बाद पानी निकाल देना चाहिए, ध्यान ये भी रखे की खेत को एकदम भी सूखा ना कर करें कि इसकी मिट्टी मे दरार आने लगे । ऐसा इसलिए किया जाता है कि इससे धान की जड़ों पर सीधे धूप पड़े और फसल को ऑक्सीजन भरपूर मात्रा मे मिल सके । इस दौरान आप इसकी निराई – गुड़ाई भी कर सकते है। ये सब प्रक्रिया पूरा करने के बाद दोबारा खेत को पानी से भर दें ।
धान मे चलाएं पाटा:- आपको धान की रोपाई के 20 दिन बाद पाटा जरूर चलना चाहिए। इसे करने के लिए 10-15 फीट का बांस ले ओर दो बार पाटा लगा दें। ऐसा करने से धान की फसलों मे झटका लगता है और जो फसलें बढ़ नहीं पाती है उसे भी निकालने / बढ़ने का मौका मिलता है । ध्यान दे पाटा लगते समय खेत मे पानी जरूर होना चाहिए । पाटा लगाने का एक ओर ये फायदा है की फसल मे लगने वाले सूँडी जैसे कीड़े झड़कर कर नीचे पानी मे गिरकर नस्ट हो जाते है जिससे ओ फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं । ध्यान रखे कि जब भी पाटा लगाए तो उलट और सीधा दोनों दिशा मे लगाएं ।
खरपतवार को नस्ट करने के लिए दवा का उपयोग
धान की रोपाई के बाद खरपतवारनाशी का इस्तेमाल जरूर करें । आप इसके निरान्त्रण के लिए 2-4D खरपतवारनाशी का उपयोग कर सकते हैं ।वही धान की फसल मे खरपतवार नियंत्रण के लिए आप पेंडिमेथलीं 30EC का 315 लीटर मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 850-900 लीटर पानी मे मिलाकर खेती में प्रयोग करें ।
धान में धानजाइम गोल्ड का इस्तेमाल
यह एंजाइम गोल्ड समुद्री घास से निस्सारित किया गया एक जैविक तकनीकी उत्पाद है । यह धन के पौधों मे बढ़ोतरी को प्रेरित करता है , जिससे आगे चलकर इसकी अच्छी पैदावार होती हैं । साथ ही , यह पौधों में लगने वाले रोगों और कीटों से भी लड़ता है । धानजाइम गोल्ड को एक मिलीलीटर की दर से एक लीटर मिलाकर 500 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर छिड़काव करें ।
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