Krishi Roadmap 4 : अब सेहतमंद अनाज पे फोकस
Krishi Roadmap 4 मे दलहन , तेलहन, लेयर फ़ार्मिंग , डेयरी और फिशरीज के अलावा मिलेट, कृषि विविधीकरण , जलवायु अनुकूलन कृषि पर विशेष फिकस रहेगा। राज्य के तीसरे कृषि रोड मैप 1 अप्रैल 2023 स्व लागू होगा । इसकी अवधि मार्च 2028 तक रहेगी।

1 अप्रैल से लागू होने वाला Krishi Roadmap 4 मे क्या है खास ?
अब आप अपने गाँव ही मौसम आधारित खेती कर सकेंगे। क्यूंकी मौसम आधारित खेती वाले गाँव की संख्या दोगुने से भी अधिक करने का सरकार का लक्ष्य है। यही नहीं खेती मे यूरिया के कम इस्तेमाल और ज्यादा सेहतमंद अनाज की पैदावार पर पूरा फोकस होगा। धन और गेंहु की तुलनामे दलहन, तेलहन, मिलेट फसल का एरिया बढ़ाने का लक्ष है। मोटे अनाज का उत्पादन बढ़ाने के लिए मिशन मोड मे कार्यक्रम चलाए जाएंगे। सरकार ने मिट्टी से लेकर आपकी सेहत को ध्यान मे रखकर Krishi Roadmap- 4 तैयार किया है।
कृषि रोडमैप- 4 निम्नलिखित विषय पर ध्यान दिया जाएगा।
- आपका स्वास्थ
- भूमि का स्वास्थ
- आपकी शिक्षा
- आपका पशु संसाधन
आपका स्वास्थ: चौथे कृषि रोड मैप मे मुख्य रूप ध्यान ये रखा जाएगा की खेती मे यूरिया का उपयोग कम से कम हो जिससे आपकी सेहत बनी रहे और ज़्यादतर यूरिया से होने वाले गंभीर बीमारी का शिकार न हो सके। इसीलिए खेती मे यूरिया कम इस्तेमाल किया जाएगा और मौसम चक्र के हिसाब से खेती हो। मोटे अनाज के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा और बंजर व गैर कृषि योग्य भूमि में लेमन ग्रास, मेथी आदि खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
भूमि का स्वास्थ: भूमि का स्वास्थ ठीक करने के लिए पुआल जलाने पे रोक पर खास ध्यान दिया जाएगा। मिट्टी और जल संकर्षण पर अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए गया मे सेंटर ऑफ एक्सलेन्स बनेगा। उर्वरक शक्ति बढ़ाने के इसपर नए रिसर्च के माध्यम से काम किया जाएगा।
आपका रोजगार: कृषि रोडमैप के माध्यम से रिजगर के अवसर बढ़ाने पर भी फोकस होगा। कृषि विभाग के तहत 9 हजार रिक्त पड़ भरने की अनुमति मिलेगी। पौधे संरक्षण केंद्रों और कृषि यंत्र बैंक के माध्यम से युवाओं को रोजगार दिनलाने का प्रावधान होगा।
आपकी शिक्षा: गया मे सेंटर ऑफ एक्सलेन्स के साथ साथ बिहार कृषि विवि की सुसज्जित बसें विशेषज्ञों के साथ गाँव मे किसानों को फिल्म और अन्य तकनीकी के माध्यम से विभिन्न फसलों के बेहतर उत्पादन का प्रशिक्षण दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
आपका पशु संसाधन: पशुओं में बांझपन को रोकने के लिए शिविर का आयोजन होगा। शेष बचे पशु अस्पताल का निर्माण और आधुनिकरण भी होगा। प्रति एक हजार कृत्रिम गर्भधारण पर एक इकाई कार्यकर्ता के माध्यम से गर्भधारण कार्य होगा।

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